Top 10 Moral Stories in Hindi | बच्चों की दस प्रेरक कहानियां



दोस्तों यहाँ दस सबसे अच्छी कहानियों का कलेक्शन हैं, जिसे रीडर्स ने बहुत पसंद किया हैं।  यह सभी कहानियाँ इसी वेबसाइट की हैं, लेकिन आप उसे यहाँ एक ही लेख में पढ़ सकते हैं।

Top 10 Moral Stories in Hindi


   1. अपने अंदर की खासियत को जानें  


Top 10 Moral Stories in Hindi – एक जंगल में एक कौआ रहता था, एक दिन उसने एक हंस को देखा तो उसने 
सोचा की हंस कितना सुंदर हैं। उसके पंख कितने अच्छे हैं। 

Top 10 Moral Stories in Hindi

कौआ ने जब हंस के पास गया और उसकी तारीफ की तो हंस बोला – नहीं मित्र में तो हमेशा सोचता हूँ की मुझ से सुंदर तोता हैं। 

क्यों की वह इंसानों जैसी आवाज भी निकाल लेता हैं , उसके पास दो रंग हैं। 

अब कौआ तोता से मिलने गया और कहा – मित्र तुम कितने सुंदर हो, क्या में भी तुम्हारे जैसा बन सकता हूँ ?

तोते ने कहा – मित्र में तो समझता हूँ की मुझ से सुंदर मोर हैं उसके पास बहुत सुंदर पंख हैं, और मोर नाच भी सकता हैं जिसे देखने बहुत से लोग आते हैं। 

अब कौआ मोर के पास गया और बोला – मित्र तुम कितने सुंदर हो तुम जैसा दिख सकता हूँ। 

मोर ने कहा – मित्र में तो सोचता था की इस जंगल का सबसे अच्छा पक्षी कौआ हैं…क्यों की कौआ जहाँ चाहे उड़ कर जा सकता हैं , कौआ मजबूत पक्षी होता हैं, और अगर देखा जाए तो सभी पक्षियों में कौआ ही अकेला पक्षी हैं जिसे पिंजरे में नहीं रखा जाता हैं। 

अब कौए को बात समझ आ गयी, और उसने मोर को धन्यवाद दिया और वहाँ से उड़ गया। 


सीख – दोस्तों हम हमेशा दुसरे की खासियत को देखते रहते हैं, हमारे अंदर जो खासियत मौजूद हैं वो हमे नहीं दिखता, इस कहानी का मतला यह बताना है की हमें दूसरों से पहले अपने अंदर की खासियत को समझना चहिये। 

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 2. खरगोश का विश्वास 


Top 10 Moral Stories in Hindi – एक समय की बात है। किसी गांव में खरगोश, बकरी, घोड़ा और गधा इन चारों में बहुत अधिक मित्रता थी, वे एक साथ एक ही मैदान में घास चरने के लिये जाया करते थे।

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इन सभी जानवरों में सबसे छोटा और सबका नन्हा दोस्त था खरगोश। खरगोश का पेट तो थोड़े से घास से ही भर जाता था, बाकि तीनों जानवरों को अधिक घास खाना होता था। 
इसलिये जब खरगोश का पेट भर जाता तब वह सभी जानवरों के साथ खूब खेलता था।  
वह कभी घोड़े की पुँछ पकड़कर उसके पीठ पर बैठ जाता था। तो कभी बकरी के कान पकड़कर खींच देता, और कभी गधे को पीठ पर बैठकर कूदने लगता था।

एक दिन की बात है, उस मैदान में एक शिकारी कुत्ता आया, उसने जैसे ही खरगोश को देखा वह तुरंत खरगोश का शिकार करने के लिए दौरा।
उस दिन तो खरगोश दौड़कर झाड़ियों में भाग गया, लेकिन वह कुत्ता उसका शिकार करना चाहता था, खरगोश को देखते ही वह दौड़कर उसे पकड़ना चाहता था। 
खरगोश ने अब मैदान जाना और घास खाना छोड़ दिया, अब वह जंगल की थोड़ी सी पत्तियाँ खाता और जंगल में ही रहता था। 
बहुत दिन तक खरगोश मैदान नहीं गया, उसे अपने दोस्तों की याद आ रही थी। एक दिन वह शिकारी कुत्ते से बचकर मैदान गया, उसे देखते ही जानवरों ने पूछा – तुम इतने दिनों से घास चरने क्यों नहीं आते थे। 
खरगोश ने कहा – एक शिकारी कुत्ता इस मैदान में आया है, वह मुझे मार डालना चाहता है, इसलिए में अब मैदान में नहीं आता हूँ। अब तुम सब ही मेरी मदद कर सकते हो। 
खरगोश ने पहले घोड़े से कहा – दोस्त तुम तो इतने बड़े और ताकतवर हो, जब वह शिकारी कुत्ता यहाँ आये तो तुम उसे अपने टाप से मार डालना।

घोड़ा ने कहा – दोस्त में तो घोड़ा हूँ, में बस दौड़ना जनता हूँ, और टाप तो में रुकने के लिए मारता हूँ, में उस कुत्ते को नहीं मार सकता, वह एक शिकारी कुत्ता है अगर वह टाप से बच गया तो मुझे काट लेगा। 
अब खरगोश गधा के पास गया और बोला – दोस्त तुम मेरी मदद कर सकते हो, तुम्हे लात मारना आता है। जैसे वह कुत्ता यहाँ आये तुम उसे लात मारना, तुम्हारे लात मारने के बाद वह यहाँ नहीं आयेगा।

गधे ने कहा – दोस्त में तो गधा हूँ।  में बस काम करना समझता हूँ, अगर वह कुत्ता मेरी लात से बच गया तो मुझे काट लेगा। इसलिए में उसे लात नहीं मार सकता हूँ। 
अब खरगोश तीसरे दोस्त बकरी के पास गया और उससे कहा – दोस्त तुम्हारे पास नुकीली सींग है, जब वह कुत्ता यहाँ आये तो तुम उसे अपनी नुकीली सींग से मार देना।

बकरी ने कहा – दोस्त में तो बस एक बकरी हूँ। जब घोडा, गधा उससे नहीं नहीं भगा सकते तो में उसे कैसे भगा सकती हूँ। खरगोश उन सभी की बात सुनकर बहुत उदास हुआ और वह उदास होकर बैठ गया। 
फिर खरगोश ने खुद से पूछा – मेरे पास इतने मजबूत पैर है की में सबसे तेज दौर सकता हूँ।  खरगोश से तेज  कोई भी जानवर नहीं दौर सकता है, फिर में खुद पर ही विश्वास को नही करता हूँ। 
उसके बाद खरगोश खुद पर विश्वास करने लगा, वह रोज मैदान आता और सभी के साथ घास खाता था, जैसे ही उसे वह शिकारी कुत्ता दिखाई देता वह तुरंत तेज दौड़कर भाग जाता था। 
इस तरह वह कुत्ता कभी भी उस खरगोश को नहीं पकड़ पाया, अंत में थककर वह खुद ही मैदान से दूर भाग गया। 
उस खरगोश की जीत हुयी, उसके सभी दोस्त बहुत प्रसन्न थे, वे चारो पहले की तरह मैदान में आने लगे और घास खाने लगे। खरगोश भी खूब खेलने लगा।

सीख – दोस्तों इस कहानी से हमें सीख मिलती है की हमें भी सबसे पहले खुद पर विश्वास करना चाहिये। खुद पर विश्वास करने वालों की कभी हार नहीं होती है। 

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3. किसान के चार बेटों की कहानी 

Top 10 Moral Stories in Hindi – सुंदरपुर गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था। उसका नाम मोहनलाल था। उसके चार बेटे थे। वह बहुत सुखी सम्पन्न था। उसके पास किसी चीज की कमी नहीं थी, उसकी गिनती गांव के धनी लोगो में होती थी।

isan ke char bete ki kahani
किसान और उसके चार बेटों की कहानी
मोहनलाल के पास बहुत सारा खेत था, वह अपनी मेहनत से बहुत अनाज उगाता था। उसके अनाजों से गांव की मंडी भरी रहती थी। लेकिन किसान जब भी घर आता वह अपने चारों बेटे को आपस में लड़ते – झगड़ते देखता था।

इस बात से किसान को बहुत दुख होता था। वह अपने चारों बेटों को समझाता लेकिन किसी एक के भी बात समझ में नहीं आती थी।  किसान जैसे ही बाहर जाता वे आपस में झगरने लगते थे।

किसान ने अपने बेटों को समझाने के लिये एक उपाय सोचा, एक दिन की बात हैं, किसान अपने घर एक बड़ा सा लकड़ी का गट्ठर लेकर आया और उसनें अपने चारो बेटों को बुलाया।

किसान ने कहा : तुम्हें इस लकड़ी के गट्ठर को बिना अलग किये एक साथ तोड़ना हैं।
उसके चारों बेटों ने पूरी ताकत से लकड़ी के गट्ठर को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन किसी से भी वह गट्ठर टूट नहीं सका। सब थककर बैठ गये। 
अब किसान ने उस गट्ठर को खोल दिया और गट्ठर की एक – एक लकड़ी सबके देते हुये बोला – यह लो एक एक लकड़ी और अब इसे तोड़ दो। 
इस बार चारों ने एक, एक लकड़ी उठायी और उसे बड़े ही आसानी से तोड़ दिया।
लेकिन उसके बेटों को बात समझ में नहीं आयी और एक ने किसान से पूछ लिया , पिताजी आपने हमें ऐसा करने के लिये क्यो कहा…?
किसान ने कहा – जब सभी लकड़ी एक थी। वे आपस में बंधे हुए थे। तो तुमने कितना भी कोशिस किया लेकिन तोड़ नहीं सके।
जैसे ही लकड़ी को अलग कर दिया गया, तो तुमने उसे बड़ी ही आसानी से तोड़ दिया।

ठीक उसी लकड़ी के समान तुम चारों भी हो…….तुम हमेशा आपस में झगड़ते रहते हो तुम्हारे अंदर जरा सी भी एकता नहीं हैं।

तुम ऐसे ही आपस में अलग होकर रहोगे तो किसी भी समस्या में फंस कर हार जाओगे।
लेकिन अगर चारों एक होकर रहोगे, आपस में कभी झगड़ा नहीं करोगे तो तुमें कोई भी नहीं हरा पायेगा।  जैसी तुम उस लकड़ी के गट्ठर को तोड़ नहीं पाए थे। 
अगर तुम आपस में मिलजुल कर रहोगे तो कैसी भी समस्या को तुम आसानी से सुलझा सकते हो।
अब तुम्हें सोचना हैं कि तुम आपस में प्यार से एक होकर रहना चाहते हो कि झगड़ते हुए अलग रहना चाहते हो..?
उसके चारों बेटों को बात समझ में आ गयी। उन्होंने किसान से वादा किया आज के बाद हम भी आपस में कभी भी झाडृ नहीं करेंगे , हम भी मिलजुल कर रहेंगे। 
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     4. अंगूर खट्टे हैं 

    Top 10 Moral Stories in Hindi – किसी जंगल में एक लोमड़ी रहती थी, वह भूखी प्यासी भोजन की तलाश में यहाँ वहाँ घूम रही थी। 
    तभी अचानक उसकी नजर अंगूर के एक झब्बे पर पड़ी, झब्बे में बहुत सारे अंगूर लटक रहे थे।  अंगूर को देख लोमड़ी के मुह में पानी आ गया। 
    वह अंगूर खाने के लिये उछली, लेकिन अंगूर तक न पहुँच सकी, क्यों की अंगूर की झाड़ी एक पेड़ की डाली से लगी हुयी थी।

    Angoor Khatte Hain
    अंगूर खट्टे हैं
    वह फिर से उछली, लेकिन इस बार भी वह अंगूर तक न पहुँच सकी।  वह बार – बार उछलती और नीचे गिर जाती थी, मगर एक बार भी वह अंगूर नही तोड़ पायी। 
    अंत में हारकर लोमड़ी ने एक बहुत ही अच्छा बहाना बनाया उसने कहा – में क्या करुँगी यह अंगूर खा कर यह अंगूर खट्टे हैं। और वह लोमड़ी वहाँ से चली गयी। 
    सीख – इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं की हमें अपना काम छोड़कर बहाना नहीं बनाना चाहिये। 

    ***

     5. राजा और मकड़ी की कहानी 


    Top 10 Moral Stories in Hindi – एक समय की बात हैं। सुन्दर नगर नामक एक राज्य था। वहाँ वीरकेतु नामक एक राजा राज्य करता था।

    एक दिन उसने अपने सभी मंत्रिको बुलाया और कहा कि ऐसी कोई चीज का पता लगाये जो किसी काम का नहीं हैं। जिसका कोई महत्व नहीं हैं।

    जिसका कोई उपयोग नहीं होता हैं, और जो राज्य के विकास में कोई योगदान नहीं करते हैं।

    अपने राजा की बात सुन राज्य के सभी मंत्री और सेनापति इस काम में जुट गये, वे दिन – रात ऐसी किसी चीज का पता लगाने लगे जिसका कोई उपयोग नहीं होता हैं।

    जब भी कोई एक मंत्री कोई ऐसी चीज ढूंढता तो अन्य मंत्री उस चीज का महत्व बता देते थे।
    This is an image of Raja Aaur Makdi
    राजा और मकड़ी की कहानी
    राजा को भी इस कार्य में बहुत आनंद आ रहा था। राज्य के सभी मंत्री राजा के सामने अपनी जीत चाहते थे।
    इसी तरह एक महीना बीत गया, फिर अंत में सभी मंत्री एक बात पर सहमत हो गये। उन्हें ऐसी चीज मिल गयी जिसका कोई महत्व नहीं था।
    सभी मंत्री राजा के पास पहुँचे और बोले :- महाराज ऐसी दो चीजें हैं। जिनका कोई उपयोग नहीं होता हैं। और ना ही उसका कुछ महत्व हैं।
    राजा वीरकेतु ने पूछा :-  क्या हैं वह चीज जल्दी बताओ।
    मंत्रियों ने कहा :- महाराज……मक्खी और मकड़ी, इन दोनों का कोई उपयोग नही हैं।

    यह दोनों ना तो राज्य के किसी काम आते हैं और ना ही इन छोटे – मोटे किट पतंग का कुछ महत्व हैं।
    राजा वीरकेतु बोला :- तब तो हमें मकड़ी और जंगली मक्खियों को समाप्त कर देना चाहिए।

    सैनिकों जाओ और सभी मकड़ियो और मक्खियों को मार दो, या उन्हें राज्य से बाहर निकाल दो।

    राज्य के सभी सैनिक इस काम में जुट गएवे कहीं आग जलाकर तो कहीं धुआँ फैलाकर इन मक्खियों और मकड़ियों को भगाने लगे।

    उसी समय पड़ोस के दुश्मन राजा को खबर मिली की इस राजा के सारे सैनिक मकड़ी और मक्खियों को मारने में व्यस्त हैं।

    सने अच्छा मौका पाकर इस राज्य पर बहुत सारी सेनाओं के साथ आक्रमण कर दिया।
    राजा वीरकेतु के सभी सैनिक पूरे राज्य में बिखरे हुए थे, उनके सैनिक छोटी – छोटी टुकड़ियाँ बनाकर राज्य में मक्खी और मकड़ियों को मारने में व्यस्त थे।
    राजा वीरकेतु ने बहुत कम सैनिकों के साथ दुश्मन सैनिकों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन दुश्मन राजा के पास बहुत बड़ी सेना थी।
    वीरकेतु के मंत्रियों ने उसे किले से दूर निकल जाने की सलाह दी, उनकी बात मान राजा किले से सुरक्षित स्थान पर निकल गया। 
    वह भागते – भागते एक पेड़ के नीचे पहुँचा और बैठ गया, थके होने की वजह से उसे नींद आ गयी।
    कुछ देर बाद एक जंगली मक्खी ने राजा को जोर का डंक मारा और राजा की नींद अचानक खुल गयी।
    राजा की नींद खुल तब उसे याद आया की दुश्मन सैनिक उसका पीछा कर रहे हैं। इस तरह खुले में सोना खतरों से खाली नहीं हैं। 

    वह उठा और जंगल की तरफ भाग गया, वहां उसने एक पुरानी गुफा देखी, वह गुफा को सुरक्षित समझ उसमें छुप गया।
    राजा के गुफा में जाने के बाद मकड़ियों ने द्वार पर जाल बुन दिया।
    कुछ समय बाद दुश्मन सैनिक उसे खोजते – खोजते वहां भी पहुँच गए, उनकी आवाज सुन राजा घबरा गया।
    वे गुफा में घुसने वाले थे, लेकिन तभी उनके सेनापति की नजर उस मकड़ी के जाल पर गयी, जाल गुफा के द्वार पर बना हुआ था।
    सेनापति बोला :- सैनिकों वीरकेतु यहाँ नहीं आया होगा, अंदर मत जाओ क्यों कि अगर राजा यहाँ गया होता तो गुफा के द्वार पर बना यह मकड़ी का जाल टूट जाता था।
    यह बोल सभी दुश्मन सैनिक गुफा के बाहर से ही लौट गये, उनकी बात गुफा के अंदर छुपा राजा सुन रहा था।
    अबतक राज्य के सभी सैनिक को यह खबर हो गयी थी की उसके राज्य पर आक्रमण हुआ हैं।
    उन्होंने एकजुट होकर युद्ध लड़ा और अपनी एकता के कारण कुछ ही दिन में वे जीत गए, सभी दुश्मन सैनिक भाग चुके थे।
    राजा वीरकेतु वापस अपने महल लौटा उसने अपने सभी सैनिकों को धन्यवाद किया, उन्हें बहुत सारा ईनाम दिया।
    फिर उसने सबको यह बात बताई की कैसे मुश्किल में मक्खी और मकड़ी ने उसकी सहायता की और दुश्मन सैनिकों से उसकी जान बचाई।
    अगर मक्खी और मकड़ियों ने उसकी सहायता नहीं किया होता तो शायद आज राजा दुश्मन सैनिकों से कैद में होता और उसकी पूरी सेना हार जाती थी।
    अब राजा सभी छोटे – छोटे चीजों का महत्व समझ गया था। उसे अपनी गलती समझ आ चुकी थी।
    सीख – इस कहानी का उद्देश्य लोगों को यह बताना हैं कि सभी चीजों का अपना एक अलग महत्व होता हैं। चाहे वह चीज छोटी हो या बड़ी इस दुनिया में ऐसा कोई भी चीज नही  जिसका कोई उपयोग या महत्व नहीं हैं।

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    6. ईमानदारी का फल 

    Top 10 Moral Stories in Hindi – एक गांव में एक गरीब लकड़हारा रहता था, वह जंगल से सुखी लकड़ियाँ काटकर उसे बाजार में बेचता और उससे अपना घर चलता था।
    उसका पड़ोसी उसे रोज कहता की तुम पेड़ की हरी टहनियाँ काटकर बाजार में बेचो उससे तुम्हें अधिक धन मिलेगा सुखी लकड़ियाँ हलकी होती हैं।

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    लेकिन वह लकड़हारा बहुत ईमानदार था, वह यह बात समझता था की हरी टहनियाँ काटने से पेड़ों को तकलीफ होती है, इसलिए वह हमेशा सुखी टहनियों को ही काटता था।

    एक दिन की बात है, लकड़हारा जंगल में बहुत देर से लकड़ी काट रहा था, दोपहर का समय हो गया था, उसने थोड़ा खाना खाया और उसी पेड़ के निचे आराम करने लगा।

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