जादुई विमान की कहानी – Jadui Viman Ki Kahani | Jadui Kahaniya in Hindi


जादुई विमान की कहानी

एक समय की बात हैं, उज्जैन नामक राज्य में दो लड़को में बहुत गहरी मित्रता थी। उनमें से एक था व्यापारी का बेटा और दूसरे के पिता लकड़ी के कारीगर थे।

दोनों मित्र हमेशा साथ रहते और एक – दूसरे को अपने कामों के बारे में बताते थे। व्यापारी का बेटे अपने मित्र को दूसरे देशों के बारे में बताता और उसका दोस्त भी उसे लकड़ी और उससे बनायी जाने वाली अलग – अलग वस्तुओं के बारे में बताता था।

Jadui Viman Ki Kahani

एक दिन कारीगर के लड़के ने अपने मित्र को एक लकड़ी का अनोखा विमान दिखाया और बताया की यह विमान कोई साधारण विमान नहीं है। बल्कि यह एक जादुई विमान है जो हवा में उड़ सकता हैं।

व्यापारी के लड़के को उसके बात पर विश्वास नहीं हुआ वह तुरंत जादुई विमान में बैठ गया और बोला – यह विमान कैसे उड़ता हैं ?

उसके दोस्त ने बताया – देखों अगर तुम्हें इस विमान को उड़ाना हो तो इस रस्सी को खोल देना इससे यह विमान हवा में उड़ने लगेगा उसने एक रस्सी की तरफ इशारा करते हुये बताया।

वह आगे बोल ही रहा था की व्यापारी के बेटे ने जादुई विमान का रस्सी खोल दिया। बस फिर क्या था विमान हवा में उड़ने लगा…..कुछ ही समय में विमान बहुत दूर जा पहुँचा। वह उड़ता जा रहा था। वह विमान में बैठ पुरे राज्य का सैर करने लगा।

लेकिन कुछ समय बात उसे याद आया की उसे तो विमान को नीचे उतरने के बारे में कुछ पता ही नहीं हैं। अब वह विमान में बैठ कर चिल्लाने लगा और अपने मित्र को बुलाने लगा।

मगर जादुई विमान तो बहुत दूर जा चूका था। अब हवा में उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था और विमान अपने गति से हवा में उड़ता जा रहा था।

इधर कारीगर का लड़का अपने मित्र के बारे में सोच कर रो रहा था। लेकिन विमान तो बहुत दूर जा चूका था।

जब शाम तक व्यापारी का लड़का घर वापस नहीं लौटा तो व्यापारी उज्जैन के राजा के पास गया और उसने इस बात की शिकायत राजा से किया और उसने कारीगर के बेटे के बारे में भी बताया की उसका लड़का कारीगर के लड़के का मित्र था।

अब राजा के सैनिक उस कारीगर के लड़के को गिरफ्तार कर ले आये और उससे सवाल पूछने लगे। कारीगर के लड़के ने सबकुछ सच – सच बता दिया मगर किसी को उसने बात और जादुई विमान पर विश्वास नहीं हो रहा था।

उज्जैन के राजा बहुत चतुर थे। वे समझ गये की यह लड़का सच बोल रहा है। उन्होंने लड़के को एक और जादुई विमान बनाने के लिए कहा और विमान बनाने के लिए पूरी सामग्री भी उसे दिया गया।

लड़के को भी अपने मित्र की बहुत याद आ रही थी, उसने एक ही रात में दूसरा जादुई विमान बना दिया और राजा के सामने उस विमान को दिखाया। विमान देख राजा भी चकित थे।

राजा के विमान के बारे में उस लड़के से पूछा, लड़के ने बताया की यह विमान रस्सी खोलने से जिस में दिशा में यह खड़ा होगा उस दिशा में उड़ने लगेगा और जब विमान को नीचे उतरना हो तो आप इसकी रस्सी वापस बांध दीजियेगा।

फिर राजा ने पूछा की यह विमान बिना रस्सी बंधे कितनी देर तक उड़ता रहेगा? उस लड़के ने बताया की अगर आप रस्सी नहीं बंधेंगे तो यह विमान सूरज ढलने और शाम होने तक हवा में उड़ता रहता हैं।



राजा वह विमान लेकर उसी जगह पहुँचे जहाँ से व्यापारी का लड़का हवा में उड़ा था, ठीक उसी दिशा में विमान को रखा गया और फिर राजा विमान में बैठ रस्सी खोल दिया।

रस्सी खोलते ही विमान हवा में उड़ने लगा। राजा विमान में बैठे रहे और बिना रस्सी बंधे विमान उड़ता गया। शाम तक विमान नगर के दूर एक पहाड़ तक चला गया और फिर शाम में विमान खुद नीचे उतर गया।

राजा समझ गये की जरूर व्यापारी का लड़का भी यही होगा। उन्होंने उस लड़के को ढूँढना शुरू किया। कुछ देर बाद व्यापारी का लड़का एक पत्थर पर मूर्छित मिला, वह विमान से उतरने के बाद मूर्छित हो गया था।

अब तक अँधेरा हो चूका था। राजा ने रात में आग जलायी और उस लड़के को पानी पिलाया। व्यापारी के लड़के ने राजा को पहचान गया।

उसने राजा को प्रणाम किया और पूरी बात बतायी। राजा ने कहा – कोई बात नहीं अब तुम सुरक्षित मेरे साथ हो हम कल इसी विमान से अपने घर चलेंगे।

अगले दिन राजा और व्यापारी का लड़का दोनों उसी विमान में बैठकर वापस महल पहुँच गये। राजा के पहुँचते ही सब उनकी जय जयकार करने लगे। पुरे नगर के लोग राजा की बुद्धि और साहस की चर्चा कर रहे थे।

राजा ने उस दोनों मित्र की तरफ की और दोनों को महल में रहने के लिए कहा। कुछ दिन बात व्यापारी का लड़का राजा का मंत्री बना और कारीगर का लड़के को राजा ने अपना सेनापति बनाया।

सेनापति बनते ही उस लड़के ने बहुत से जादुई विमान बनाया और अब अपने नगर की सुरक्षा विमानों से करने लगा, मंत्री ने भी उज्जैन को सबसे अच्छा व्यापर करने वाला नगर बनाया और कुछ ही वर्षों में उज्जैन एक धनी और सुरक्षित नगर बन गया।

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दोस्तों ये थी जादुई विमान की कहानी (jadui viman ki kahani) इस कहानी से हमें यह सीखना चाहिये की हमेशा अपने अंदर के कला को ज्यादा महत्व दें क्यों की आपके अंदर का कला ही आपका असली धन हैं।

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