जादुई अमरुद पेड़ की कहानी – jadui paid ki kahani


जादुई अमरुद पेड़ की कहानी

jadui paid ki kahani

एक समय की बात हैं। किसी गांव में एक बुढ़िया रहती थी…उसके पास एक अमरुद का पेड़ था। उस पेड़ में बहुत ही मीठे अमरुद फलते थे।

बुढ़िया अमरुद तोड़कर गांव में बेचती और उसी से अपना गुजरा करती थी।

जब वह अमरुद बेचने गांव में जाती उसी समय गांव के नटखट बच्चे अमरुद के पेड़ पर चढ़ जाते और कुछ अमरुद खाते और कुछ तोड़कर नीचे फेंक देते थे।

जब बढ़िया शाम को वापस लौटती तो उसे पेड़ के निचे बहुत सारा अमरुद फेंका हुआ दिखता यह बुढ़िया बहुत रोती थी।

वह गांव के बच्चो को समझती की अमरुद फल होता हैं उसे फेंकना नहीं चाहिये।

लेकिन बच्चे उस बुढ़िया की एक नहीं सुनते और वे अगले दिन फिर से अमरुद खाते और कुछ फेंक देते थे।

एक रात बुढ़िया ने सपने में देखा की उसके घर के पास से भगवान जा रहे हैं। अचानक भगवान के रथ का एक पहिया खराब हो गया। बुढ़िया ने जब यह देखा तो वह तुरंत रथ के पास गयी।

बुढ़िया ने भगवान को प्रणाम किया और फिर वह एक हथोड़े से रथ के पहिया को ठीक करने लगी….जल्दी ही उसने पहिया ठीक कर दिया। यह देख भगवान प्रसन्न हुये और उन्होंने उस बढ़िया से वरदान मांगने के लिये कहा।

बुढ़िया ने भगवान से कहा – मेरे पास एक अमरुद का पेड़ हैं। में वही अमरुद बेचकर अपना गुजरा करती हूं इसलिये आप कोई ऐसा वरदान दीजिये जिससे बच्चे उस पेड़ की अमरुद खराब नहीं कर सके।



भगवान ने बुढ़िया को वरदान दिया और वे अचानक अंतरध्यान हो गये। उसी समय बुढ़िया की आँख खुली उसने भगवान को धन्यवाद दिया, वरदान पा कर वह बहुत प्रसन्न थी।

अगले दिन बुढ़िया फिर से अमरुद लेकर गांव में बेचने गयी। उसी समय कुछ बच्चे पेड़ पर चढ़ गये, उनमें से कुछ बच्चों ने अमरुद सिर्फ खाया और नीचे उतर गये। लेकिन कुछ बच्चे ने अमरुद तोड़कर फेंक दिया।

जैसे ही बच्चों ने अमरुद फेंका वे पेड़ पर चिपक गये अब वे नीचे उतरने की कोशिश करते मगर पेड़ तो जादुई पेड़ बन गया था। वे रोने गले और बुढ़िया को बुलाने लगे।

शाम को जब बुढ़िया वापस आयी तो उसने कुछ बच्चो को पेड़ पर चिपका देखा। बुढ़िया को देखते ही बच्चे रोने लगे। बुढ़िया ने कहा – रुको में अभी तुम सब को नीचे उतारती हूँ।

उसने पेड़ से कहा – जादुई पेड़ बच्चे अब अमरुद खराब नहीं करेंगे उन्हें छोड़ दो। बुढ़िया के इतना कहते ही बच्चे पेड़ को छोड़ दिया वे नीचे आ उतर गये थे।

बच्चो ने बुढ़िया से माफी मांगी और आगे से कभी भी अमरुद खराब नहीं करने का वादा किया। इसलिये कहते हैं की किसी भी खाने की चीज को खराब नहीं करना चाहिये, अन्न और फल बहुत परिश्रम से उगाये जाते हैं।

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सीख – दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की खाने की चीज को कभी भी खराब नहीं करना चाहिये। आशा है की आपको यह जादुई पेड़ की कहानी अच्छी लगी होगी। आप को आगे कौन की कहानी पढ़नी हैं हमें कमेंट में जरूर बतायें आपके बताये गये विषय पर जल्दी ही कहानी लिखी जायेगी। धन्यवाद।

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