कर्म बड़ा की भाग्य – Short Motivational Stories In Hindi With Moral


Short Motivational Stories In Hindi With Moral

एक बार की बात हैं। राजा विक्रमादित्य के दरबार में दो व्यक्तियों के बीच सवाल को लेकर समस्या उत्पन हो गयी। उनमें से एक थे पुजारी, उनका मानना था की मनुष्य को जो भी मिलता हैं भाग्य से मिलता हैं। मनुष्य का भाग्य बड़ा होता हैं।

दूसरा आदमी एक व्यापारी था। उसका मानना था की आदमी को जो भी मिलता हैं वह उसके कर्म से मिलता है। मनुष्य का कर्म भाग्य से बड़ा होता है।

राजा विक्रमादित्य ने दोनों की बातें बड़े ही ध्यान से सुनी उन्होंने उस समय फैसला नहीं सुनाया क्यों की सवाल थोड़ा जटील था आखिर कौन बड़ा भाग्य या कर्म।

फैसला सुनाने के लिए उन्होंने एक कुछ समय माँगा। जबतक फैसला नहीं हो जाता विक्रमादित्य के उन्हें अतिथि बनकर महल में रहने का निवेदन किया।

दिनभर दोनों महल में घूमने रहे। जब रात हुयी तो राजा विक्रमादित्य ने पुजारी के लिए चावल और दाल भेजवा दिया, व्यापारी के लिए विक्रमादित्य ने चावल और कद्दू भेजवा दिया।

व्यापारी बहुत बुद्धिमान था, उसने सोचा की राजा विक्रमादित्य ने उन्हें पुजारी को दाल भेजा जो अच्छी है, और मुझे कद्दू भेजा है यह कद्दू अंदर सरी हुयी भी हो सकती हैं।

उसने पुजारी से कहा – पुजारी जी मुझे कद्दू खाना अच्छा नहीं लगता है। अगर आपको कद्दू खाना अच्छा लगता है तो मुझे दाल दे दीजिए और यह कद्दू ले लीजीये।



पुजारी जी ने कहा – इसमें पूछने की क्या बात हैं, लीजिये आपको जो भी अच्छा लगता हैं वह खाइये में तो ठहरा पुजारी मुझे भाग्य से जो मिल जाता है में वह खाकर प्रसन रहता हूँ।

यह सुनते ही व्यापारी ने अपना कद्दू पुजारी के दाल से बदल लिया। ठीक उसी समय विक्रमादित्य आ गये, उन्होंने पूछा यह कद्दू आपके पास कैसे ? हमने तो यह कद्दू व्यापारी जी के लिये भेजा था।

व्यापारी ने संदेह वाली बात विक्रमादित्य को सच – सच बता दिया। तब विक्रमादित्य ने कहा – देखा मिल गया आपका जबाब, यही हैं कर्म और भाग्य का खेल। उन्होंने उस कद्दू को काटने के लिये कहा।

जैसे ही पुजारी जी ने कद्दू को काटा उसने अंदर हीरा – मोती भरे हुये थे। यह देख सबकी आँखें चौंक गयी।

राजा विक्रमादित्य ने कहा – देखा व्यापारी जी भाग्य से जो आपको मिल रहा था संदेह में आपने उसे गवा दिया। पुजारी जी ने इस विषय पर सोचा भी नहीं उसे यह सब मिल गया।

इसलिये भाग्य के बारे में मत सोचिये, भाग्य से वही मिलता है जो मिलना होता हैं। मगर कर्म और परिश्रम से मनुष्य सबकुछ पा सकता हैं। एक मनुष्य के नाते आप अपने कर्म और परिश्रम पर ध्यान दें।

दोस्तों उम्मीद है की आपको यह कहानी पसंद आयी होगी। इस कहानी के अनुसार दोनों बराबर हैं, लेकिन हमें सबसे पहले अपने कर्म और परिश्रम पर ध्यान देना चाहिये। इस कहानी के बारे में आप अपने विचार हमें नीचे कमेंट में जरूर बतायें। कहानी पसंद आयी तो इसे WHATS APP और FACEBOOK आदि पर शेयर जरूर करे, धन्यवाद।

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