प्रेरणादायक कहानी – Motivational Story In Hindi 2019 for Student’s & Entrepreneur’s



दोस्तों, आज हम ऐसी Motivational Story In Hindi शेयर कर रहे हैं जो पढ़ने के बाद आप भी यह बोलेंगे की वाकई में आसान हैं….। दोस्तों आज हमारे देश में बहुत से ऐसे Student’s और Entrepreneur’s हैं जो अपना Business शुरू करना चाहते हैं। लेकिन जैसे ही वो Business शुरू करने की बात करते हैं, लोगों के तरफ से कुछ ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं जो बहुत खराब हैं। जैसा की…..

आज के समय में Business करना संभव नहीं हैं।

हमारे जैसे लोगों के लिये Business नहीं हैं।

आज Business में कम्पटीशन बहुत बढ़ चूका हैं।

Business के लिये बहुत पैसा चाहिये।

हमारे देश में Business करना कठिन हैं।

दोस्तों अगर आप भी कुछ नया शुरू करने की बात किसी से करते हैं तो गारेंटी हैं की आपको यह बातें सुनने को मिली होगी, और सच में कहूँ तो आज के समय में Competition बहुत बढ़ चूका हैं  यह बात आपको ज्यादातर young लोग ही बोलते हुये मिलेंगे, और अगर आप उन लोगों के को देखेंगे तो आप पायेंगे की वे कुछ नहीं कर रहें हैं।

ऐसे लोगों से एक बात में पूछना चाहता हूँ की ये आज कब शुरू हुआ और कब खत्म होगा ? क्यों की हम यह बात कई सालों से सुनते आ रहें है। दोस्तों आज हम पढ़ते है एक Motivational Story In Hindi प्रेरणादायक कहानी जो ऐसी ही एक युवक की कहानी हैं, जो व्यापर करना चाहता हैं।

Motivational Story In Hindi – रामु की दुकान

एक समय की बात हैं, किसी गांव में एक युवक रहता था, उसका नाम रामु था। बचपन से ही उसे एक व्यापारी बनने का शौख था और वह एक बड़ा व्यापारी बनना चाहता था।

एक दिन उसने व्यापर के लिये धन जुटाने एक साहुकार के पास धन उधार लेने गया। जब वह साहूकार के पास पहुंचा तो देखा की साहूकार एक आदमी पर गरज रहा था।

उस आदमी ने उसका पुराना उधार नहीं चुकाया था और अब और उधार मांग रहा था। साहूकार ने उस आदमी से गुस्से में कहा – अरे तुम क्या समझते हो व्यापर सिर्फ पैसों से होता हैं…? असली व्यापारी वह है जो भुने चने बेचकर एक बड़ा व्यापारी बन सकता हैं। अपने बगल में रखे चने को दिखते हुये बोला।

यह सब देख रामु के दिमाग में कुछ चला और उसने बिना उधार लिये ही वहाँ से वापस अपने घर आ गया। घर पहुँचकर उसने अपने घर से कुछ चना लिया और एक जंगल के नजदीक चला गया।

उस जंगल में प्रतिदिन बहुत से लकड़हारे लकड़ी काटने जाते थे। अब रामु ने अपनी छोटी सी दुकान उस जगह खोली जहाँ ग्राहक तो उतने ज्यादा नहीं थे, मगर दुकान भी वहां रामु ने आलावा किसी का नहीं था।

जंगल में लकड़ी काटते हुये लकड़हारे जब थक जाते तो वे रामु के दुकान पर आकर भुने हुये चने खाते, रामु भी एक ईमानदार व्यापारी था, वह चने के साथ में नमक, प्याज, मिर्ची इत्यादि भी लकड़हारों को देता था।

उसने चने खाने के बाद लकड़हारे घड़े का ठण्डा पानी पीते और बदले में रामु को कुछ लकड़ी देते थे, रामु दिनभर अपनी दुकान चलाता और शाम तक इकठ्ठा हुये लकड़ी को बाजार में बेचकर अच्छा पैसा कमाता था।

इस तरह जब रामु ने जब कुछ समय अपना व्यापर चलाया तो उसे बहुत पैसा मिला, अब उसने इस दुकान के साथ – साथ एक और फर्नीचर की दुकान खोली, जिसमें वह सूंदर – सूंदर लकड़ियों के खिलौने बनवाता था।

उसने गांव के सभी कारीगरों को अपनी दुकान में नौकरी पर रखा और उन्हें अच्छी मजदूरी भी देने लगा, उसकी ईमानदारी की सब बातें किया करते थे। उसने सभी लकड़हारों से भी अच्छी किस्म की लकड़ी खरीदना शुरू कर दिया।

अब लकड़हारों को अपनी लकड़ी बेचने कही दूर नहीं जाना पड़ता था, वे जंगल से अच्छी लकड़ी काटते और उसे अच्छे कीमत पर रामु को बेच देते थे।

कुछ ही दिनों में रामु के पास बहुत से अच्छे – अच्छे लकड़ी के खिलौनों का ढेर लग गया, अब रामु ने उन सभी खिलौनों को दूर शहर में बेचने का फैसला किया।

उसने शहर की खिलौनों के दुकानों में जाकर उन सभी खिलौनों को बहुत अच्छे दामों में बेच दिया, उससे रामु के पास बहुत पैसा इकठ्ठा हुआ, अब रामु अपने सभी कारीगरों और लकड़हारों को अच्छी सुविधा देने लगा।

इस तरह धीरे – धीरे रामु की दुकान एक खिलौनों की फैक्ट्री बन गयी, वह अब बहुत से अच्छे मशीनों से कई तरह के खिलौने बनाने लगा, उसके गांव में लोगों की बेरोजगारी दूर हो गयी और एक चने की दुकान से रामु ने एक बड़ी फैक्ट्री खोल लिया और अब वह एक अच्छा व्यापारी बन गया।

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दोस्तों इस कहानी में रामु को यह बात समझ आ गयी की सिर्फ पैसों से ही व्यापर नहीं होता हैं। बल्कि एक सफल व्यापारी बनने के लिये एक अच्छा कदम उठाना पड़ता है।

आप हमारे देश के सफल entrepreneur’s जैसे की संदीप माहेश्वरी सर, रीतेश अग्रवाल, भावेश अग्रवाल, सचिन बंसल, कुनाल बंसल जैसे लोगों को देख सकते हैं…इन लोगों ने कितने अच्छे से अपने business को आगे बढ़ाया, आज हमें इनसे कुछ सीखना चाहिये और एक job seeker से job provider बनना चाहिये।

कोशिश आखरी साँस तक करनी चाहिये

क्यों की

“मंजिल “मिले या “तजुरबा “

चीजें तो दोनों ही “नायब ” हैं.

दोस्तों आशा है की आपको यह Motivational story in hindi अच्छी लगी होगी, इस कहानी के बारे में आप अपने विचार हमें कमेंट में जरूर बताये। इस कहानी को Facebook & Whats appपर शेयर जरूर करे और ऐसी ही Moral / Motivational Stories in Hindi पढ़ने के लिये हमारे Facebook page को Like करे।

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