घायल चिड़िया की कहानी – Chidiya ki kahani


यह एक चिड़िया की कहानी chidiya ki kahani है इस कहानी में एक चिड़िया बहुत घायल रहती हैं, उसे एक बच्चे ने बचाया और उसकी देखभाल किया। इस कहानी को जरूर पढ़ें यह बहुत ही रोचक कहानी हैं।

मोहन नाम का एक छोटा सा बच्चा था। वह गांव के स्कुल में पढता था, एक दिन की बात हैं स्कुल की छुट्टी हो गयी थी। मोहन अपने घर वापस आ रहा था।

मोहन के घर आने के रास्ता बहुत से आम के बगीचों और खेतों से होता हुआ था, वह अपने घर आ रहा था, उसी समय मोहन को झाड़ियों में छुपी एक सोन चिड़िया दिखी।

तभी मोहन ने देखा की दो कौवे उस चिड़िया का खाने के लिये ऊपर उड़ रहे हैं, अचानक एक कौवे ने उस छोटी सी चिड़ियाँ पर झपट्टा मारा, मोहन ने तुरंत उस कौवे को भगा दिया।

मगर मोहन अब समझ चूका था की यह कौवा उस चिड़िया के बच्चे को मार डालेंगे। इसलिये उसने अपने बैग से खाली टिफिन का डब्बा निकला और उसमें कुछ घास फूस रखकर एक अच्छा का घोसला बनाया।

मोहन ने बड़े ही आराम से उस चिड़ियाँ के बच्चे को झाड़ियों से निकाला और अपने टिफिन के डब्बे में रख लिया, उसने टिफिन को ऊपर से खुला ही रखा और उसे अपने हाथ में लेकर घर आ गया।

घर पहुँचकर मोहन से सोचा की घर पर अगर किसी ने चिड़ियाँ को देखा तो मुझे डाँट सुननी होगी इसलिये मोहन ने सबसे छुपकर उस चिड़ियाँ के लिये अपने बगीचे में एक पेड़ ढूंढा जिसपर वह उस चिड़ियाँ के लिये एक अच्छा घर बना सके।

मोहन ने एक बड़ा सा डब्बा लिया और उसमें घास फुस डालकर एक घोसला बनाय जिसमें सभी तरफ से बंद था और एक छोटा सा गेट था जिसमें चिड़िया को अंदर रखा जा सकता था।



अब मोहन ने उसमें चिड़िया को रख दिया और वापस अपने घर चला गया, मोहन ने खाना खाया और फिर से कुछ अनाज का दाना लेकर उस चिड़िया को भी खिला दिया।

वह रोज स्कुल जाने से पहले चिड़िया को दाना खिलता और वापस आकर भी उसकी देखभाल करता था।

कुछ दिन बाद चिड़िया के पंख आ गये, अब वह थोड़ा – थोड़ा उड़ने भी लगी थी। एक दिन मोहन चिड़ियाँ को दाना खिलाने गया था।

मोहन ने जैसे ही घोसले का गेट खोला वह चिड़िया आकाश में उड़ गयी, मोहन कुछ देर खड़ा रहा और देखता रहा मगर चिड़िया दूर उड़कर चली गयी।

चिड़ियाँ के उड़ जाने से मोहन उदास हो गया, वह घर जाकर रोने लगा। उसे रोता हुआ देख उसकी माँ आयी उसने मोहन से कहा – चिड़िया को तुमने बचाया यह बहुत ही अच्छी बात हैं।

लेकिन जब चिड़ियाँ उड़ गयी तो उदास क्यों हो…? चिड़ियाँ का तो काम ही उड़ना होता हैं। तुम दाना उसके घोसले में रख दो चिड़ियाँ वापस आयेगी और दाना खायेगी।

मोहन की माँ ने कहा – जब तुम स्कुल जाते थे, तब में तुम्हारी चिड़ियाँ की देखभाल करती थी। तुमने अच्छा काम किया था, आज बहुत सी चिड़ियाँ विलुप्त होती जा रही है।

यह सब सुन मोहन के चेहरे पर प्रसन्नता छा गयी, वह तुरंत गया और कुछ दाना उस घोसले में रख आया, फिर बैठकर देखने लगा।

कुछ ही देर में मोहन की चिड़ियाँ के साथ बहुत सी चिड़ियाँ आयी और दाना खाने लगी, मोहन की माँ ने कहा – देखा मोहन अब कभी उदास मत होना।

अब रोज मोहन स्कुल जाने से पहले वहाँ कुछ दाना डाल देता था और जब वह वापस आता तो देखता चिड़ियाँ उसके पेड़ पर चहचहा रही हैं। मोहन के पेड़ पर बहुत सारी चिड़ियों ने अपना घोसला बनाया और रहने लगी।

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