बच्चो की कहानी : जादू से पकड़ा चोर | Baccho ki kahani


यह एक बच्चो की कहानी (baccho ki kahani) हैं जिसमें व्यापारियों के सरदार ने एक चोर को जादू से पकड़ा, चोर को पकड़ने में घोड़े ने सरदार की सहायता की हैं। जरूर पढ़ें बच्चो की कहानी।

Baccho ki kahani

एक बार की बात हैं। व्यापारियों का एक समूह व्यापर करने के लिये दूसरे राज्य जा रहा था। व्यापारियों के पास बहुत सारा सामान और काम करने के लिये कुछ नौकर भी साथ में थे।

एक दिन समूह के एक व्यापारी का बहुत सारा सामान बिका और उसे बहुत धन मिला। आज व्यापारी इतने सामन बेचकर बहुत प्रसन्न था।

शाम के समय व्यापारियों ने एक जंगल में अपना तंबू लगाया और उसी जगह रात गुजारने के लिये भोजन और अन्य सामान की व्यवस्था करने लगे। जिस व्यापारी का सामान बिका था वह भी भोजन के व्यवस्था में सामग्री इकठ्ठा कर रहा था।

अगले दिन जब सब व्यापारी उठे तब मालूम हुआ की रात में चोर ने उस व्यापारी का सारा धन चुरा लिया हैं और अब कोई भी चोरी की बात स्वीकार नहीं कर रहा था बल्कि सब एक दूसरे पर शक कर रहे थे।

समूह के सरदार ने जब यह देखा तो उसने सभी व्यापारियों को पास बुलाया और कहा – में जादुई विद्या जानता हूँ…..अभी चोर पकड़ा जायेगा कोई चिंता मत करो।

उसने एक अपना घोड़ा मँगवाया और उसके कानों में कुछ जादुई शब्द बोलने लगा। अचानक घोड़ा सभी को देखने लगा।

सरदार ने कहा – सुनो अब यह घोड़ा जादुई विद्या समझ चूका हैं। अब बारी – बारी से समूह के लोग आयेंगे और घोड़े की पीठ सहलायेंगे। चोर के छूते ही घोड़ा बेकाबू हो जायेगा।



समूह के सभी लोगों ने बारी – बारी से आना शुरू किया। घोडा अपने जगह से थोड़ा भी नहीं हिला वह सभी को बस देख रहा था मानो की वह चोर को खोज रहा हैं।

धीरे – धीरे सबने घोड़े की पीठ सहलायी मगर घोड़ा चुपचाप खड़ा रहा सबने कहा की घोड़ा चोर नहीं पकड़ सका लगता है चोर यहाँ मौजूद नहीं हैं। तभी सरदार ने कहा – रुको चोर यही हैं लगता है घोड़ा उसे पकड़ नहीं पाया हैं अब में खुद चोर को पकडूँगा

उसने बारी – बारी से सबके हाथ सूँघने शुरू और अचानक सरदार एक आदमी का हाथ सूँघते ही चिल्लाया यही चोर हैं इसे मारो, यही हैं चोर।

वह एक नौकर था। अब उसने अपनी गलती स्वीकार किया और व्यापारी का धन वापस लौटा दिया।

चोर पकड़ा गया और धन वापस मिल गया। अपने सरदार की बुद्धि और जादुई विद्या पर सबको विश्वास हो गया और वे सरदार का ज्यादा आदर करने लगे।

जिस व्यापारी का धन चोरी हुआ था। वह बाद में सरदार को धन्यवाद देने के लिये कुछ मिठाई लेकर पहुँचा। सरदार के उसे आदर से बिठाया मगर उसके चेहरे पर कुछ सवाल थे। सरदार बुद्धिमान था वह समझ गया की व्यापारी जादुई विद्या के बारे में पूछना चाहता हैं।

उसने उसे बताया की मुझे कोई जादुई विद्या नहीं आती हैं। मुझे यह बात पहले से घोड़े की पीठ पर कपूर पीसकर मिला दिया था। जादुई विद्या की बात सुनकर चोर पकडे जाने के दर से घोडा का पीठ सहलाने गया ही नहीं और जब मैंने सबका हाथ सुंघा तो चोर के हाथ से कपूर की सुगंध नहीं आ रही थी। जिससे मुझे पता चल गया की यही चोर हैं और मैंने उसे पकड़ लिया।

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