कक्षा – 5 की कहानी : सच्ची लगन | Moral stories in hindi for class 5



  Moral stories in hindi for class – 5   

Moral stories in hindi for class 5 – एक छोटे से शहर में एक स्कुल था।  उस स्कुल में एक मोहन नाम का लड़का पढता था। उसे अपनी कक्षा में फस्ट आने का बहुत शौख था। इसलिये वह खूब मन लगाकर पढाई करता था।

Moral stories in hindi for class 5
Moral stories in hindi for class 5

मगर उसकी एक बहुत ही अजीब बात यह थी की वह कभी भी समय पर स्कुल नहीं पहुँचता था। इस बार वह चौथी कक्षा पास कर पाँचवी कक्षा में पहुँचा था। 
पाँचवी कक्षा के कक्षा अध्यापक को मोहन का रोज स्कुल लेट आना ठीक नहीं लगता था, जिस कारण वे पसंद नहीं करते थे।
कुछ दिन तो उन्होंने मोहन को खूब डाँटा लेकिन अब वे उससे इतना गुस्सा रहने लगे की जरा सी गलती करने पर उसे दो छड़ी लगा देते थे। 
कक्षा में मोहन सबसे अलग था, वह स्कुल तो रोज लेट से आता था मगर पढाई में वह सबसे आगे था, अध्यापक जी जो भी पढ़ाते वह खूब ध्यान लगाकर सुनता था, उसका होम वर्क भी हमेशा तैयार रहता था। 
मोहन की बुद्धि और पढाई का जूनून देख सभी अध्यापक उसकी तारीफ करते थे। अब धीरे – धीरे मोहन अध्यापकों के नजर में अच्छा स्टूडेंट बन चूका था। 
मगर स्कुल लेट पहुँचने की वजह से अब रोज क्लास में आते ही उसे डाँट और मार खानी पढ़ती थी, रोज मार खाने के बाद भी मोहन पढाई में अच्छा ही करता जा रहा था।
एक दिन की बात हैं, मोहन अपना होम वर्क अपने मास्टर जी को दिखा था, मास्टर जी ने देखा की उसका सभी उत्तर बिलकुल सही हैं, उन्होंने मोहन के नोटबुक का दूसरा पन्ना भी देखने लगे।
मास्टर जी ने देखा उसके की बुक के आखरी पेज पर कुछ पाँच दस करके कुछ पैसा का हिसाब भी लिखा हुआ था।
अगले दिन मोहन के पिताजी को मास्टर जी ने स्कुल में बुलाया और रोज स्कूल लेट पहुँचने  की शिकायत किया और उस पांच दस रुपये के हिसाब की बारे में बताया।
मोहन के पिता जी ने बहुत ही संकोच करते हुये मास्टर जी को बताया की इस साल मेरी नौकरी छूट गयी थी, मेरे घर की स्थिति बहुत खराब हो चुकी थी।
फिर मैंने एक छोटी अपनी दुकान खोली जिसमें सुबह के समय मोहन मेरी मदद करता हैं जिस कारण उसका स्कुल देर हो जाता हैं।
मगर इस महीने में कुछ पैसा जुटाकर में अब एक स्थायी दुकान ले लूँगा, फिर मोहन का स्कुल कभी देर नहीं होगा। इसमें मेरी गलती है मगर इस महीने तक में दुकान जरूर लूँगा।
यह सुन अध्यापक जी चकित हो गये, अब उन्हें बिना पूछे मोहन को रोज डाँटने और मार ने का पछतावा हो रहा था।
अगले दिन मास्टर जी ने मोहन को छुट्टी से समय बुलाया और कहा – मोहन तुम कक्षा में फस्ट करना चाहते हैं, आजसे स्कुल के बाद में तुम्हें ट्युसन पढ़ाऊँगा।
 मोहन मास्टर जी बात सुन प्रसन्न हुआ, उसने और मन लगाकर पढ़ना शुरू कर दिया। 
जब स्कुल का आखरी रिसल्ट आया तो मोहन अपनी कक्षा में ही फस्ट नहीं आया बल्कि वह पुरे स्कुल में सबसे ज्यादा अंक लाने वाला विधार्थी बन गया। इस साल का स्कुल टॉपर प्राइज मोहन को मिला।  मोहन को देख सब बहुत प्रसन्न हुये।
सीख – दोस्तों  हमें यह सीख मिलता हैं की पढाई सच्ची लगन और पूरी ईमानदारी से करनी चाहिये, इस तरीके से पढ़ने वालों को सफलता जरूर मिलती हैं। 

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अगर आपके स्कुल में भी कोई ऐसा बच्चा है जो पूरी ईमानदारी के साथ पढाई कर रहा हैं और उसे कुछ परेशानी आ रही हैं तो प्लीज आप ऐसे बच्चों की मदद करें। 

बच्चों को डाँटने और मारने से उनका उत्साह कम होता हैं इसलिये हमेशा बच्चों को समझने की कोशिश करना चाहिये, इसलिये हर पैरेंट्स (Parents) से निवेदन है की बच्चों को डाँटने की जगह समझाये की वो कोई गलती नहीं करें। 

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