अच्छी अच्छी कहानियां | achi achi kahaniya | achi kahaniya in hindi



ACHI ACHI KAHANIYA


(achi achi kahaniya) एक समय की की बात हैं। किसी गांव में एक छोटा सा व्यापारी रहता था, उसका एक बेटा था जो व्यापर में उसकी मदद करता था। 
एक दिन की बात हैं, वह व्यापारी का लड़का जंगल घूमने जा रहा था। रास्ते में उसने देखा की एक आदमी अपनी “बातों की दुकान चला रहा हैं “
achi achi kahani
Achi Achi Kahaniya
उसके यहाँ लोग जाते और मूल्य देकर एक बात खरीदते थे। व्यापारी का लड़का भी वहाँ गया और उसने सौ सिक्के की एक की बात खरीदी। 
उसके सौ सिक्के के बदले उसे यह बात मिली की अगर दो लोगों के झगड़े से सुरक्षित निकलना हो तो  बीच  में तीसरी बात बीच में छेड़ देनी चाहिये। 

व्यापारी का लड़का उस खरीदी गयी बात से संतुष्ट नहीं था। वह बिना कुछ बोले आगे बढ़ गया। जंगल पहुँच कर वह इधर – उधर घूम रहा था। 

तभी उसने देखा कि शिकार खेलने आये मंत्री पुत्र ने एक जानवर को तीर मारा, वह जानवर तीर लगने से झाड़ियों में भागने लगा। ठीक उसी समय राजकुमार भी आया और उसने एक दूसरा तीर उस जानवर पर चलाया। 
जानवर वही मर गया। लेकिन मंत्री पुत्र और राजकुमार दोनों उस जानवर पर अपना हक बताने लगे।  देर तक वे दोनों ऐसे ही झगड़ते रहे। 
अंत में दोनों फैसले के लिए राजा के दरबार में गये और दोनों ने सबूत के रूप में इस व्यापारी के लड़के को ले गये। व्यापारी का लकड़ा बहुत आश्चर्य था।  
मंत्री पुत्र का कहना था कि जानवर पर पहले तीर मैंने मारा था। इसलिये वह जानवर मेरा हुआ। 
और राजकुमार का कहना था की जानवर को पहले मैंने तीर मारा था और वह मेरे तीर से ही मर गया था।
राजा ने दोनों की बात सुनी लेकिन कोई फैसला नहीं आ रहा था। राजा के कुछ सलाहकार मंत्री पुत्र को सच बता रहे थे। और कुछ राजकुमार को सच बता रहे थे।
राजा जब किसी नतीजे पर नहीं पहुँचे तो दोनों ने व्यापारी पुत्र को बुलाया।
राजा ने व्यापारी पुत्र से पूछा कि बताओ – हिरण का शिकार किसने किया..? व्यापारी पुत्र की तरफ राजकुमार और मंत्री पुत्र दोनों देखने लगे। उसी समय व्यापारी पुत्र को खरीदी गयी बात याद आयी।
व्यापारी पुत्र ने बीच में तीसरी बात छेड़ते हुये कहा – सच तो ये हैं कि जानवर को मैंने एक पत्थर मारा था और वह झाड़ियों में जाकर गिरा था। सभी लोग उसकी बात सुनकर चकित हो गये। 
राजकुमार और मंत्री पुत्र ने कहा – यह झूठ बोल रहा हैं। यह जानवर को अपना बताना चाहता हैं। 
यह सुन सिपाहियों ने उसे दो डंडे मारे और बाहर निकाल दिया। 
उस लड़के को बहुत गुस्सा आया, वह  गुस्से में सीधा उस आदमी के पास पहुँचा जिसने उसने वो बात खरीदी थी।
उस आदमी ने कहा – देखो तुम दो लोगों के झगड़े से सुरक्षित आ गये। अगर वहाँ तुम राजकुमार का पक्ष लेते तो मंत्री पुत्र से दुश्मनी हो जाती। अगर तुम मंत्री पुत्र का पक्ष लेते तो राजकुमार से दुश्मनी हो जाती थी। 
तुमने बीच में तीसरी बात छेड़ दी जिससे तुम सिर्फ दो डंडे खाकर सुरक्षित आ गए। अब कोई तुम्हारा दुश्मन नहीं बना। व्यापारी पुत्र को बात समझ में आ गयी। उसने आदमी को धन्यवाद दिया।
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