कहानियां ही कहानियां Kahaniya hi kahaniya


कहानियां ही कहानियां 

कौआ और गोरैया

एक समय की बात हैं। बरगद के एक पेड़ पर गोरैया अपना घोंसला बना रही थी। तभी ठंडी हवा चलने लगी गोरैया अपने आधा बने घोंसले में आराम से बैठ गयी। तभी उस पेड़ पर एक कौआ आया, वह हवा के कारण ठंडी से कांप रहा था। गोरैया कौआ को देखकर बोली-कौआ तुम एक घोंसला क्यो नहीं बना लेते ?

Image

कौआ गोरैया की बात समझने की बजाय उसपर गुस्सा कर चिल्लाने लगा। लेकिन गोरैया बोली – तुम समझते क्यो नहीं इतनी ठंडी में ऐसे हो , एक घोसला बना लो।
कौआ ने कहा – तू मेरा मजाक बना रही हैं। रुक में तेरा घोसला अभी तोड़ देता हूँ। और कौआ ने गोरैया का आधा बना घोसला तोड़ दिया, अब बेचारी गोरैया भी ठंडी में ठंड से काँपने लगी , उसे अब पछतावा हो रहा था।

इस कहानी का मतलब यह हैं कि – किसी ने सच ही कहा हैं, मूर्ख को उपदेश नहीं देना चाहिए।



गधे को बनाया चीता

एक गाँव मे एक धोबी रहता था. उसके पास एक गधा था। धोबी अपने गधे से बहुत काम करवाता था। एक दिन धोबी जब घर जा रहा था तभी उसे एक मारे हुए चीते की खाल मिली । धोबी खाल लेकर घर आया और जब रात हुई तो अपने गधे को चीते का खाल पहना कर खेत मे छोड़ आया।

उसका गधा रातभर दूसरों के खेत मे चरता और सुबह होने से पहले घर आ जाता था। सब अंधेरे में उसे चीता समझ कर कुछ नहीं कहते और अपनी खेत की रखवाली छोड़ भाग आते थे। एक रात की बात हैं। गधा बहुत चर लिया और फिर जोर – जोर से बोलने लगा। उनकी सच्चाई खेत के रखवालों को समझ आ गयी , सबने उसे डंडे से बहुत पिटा , बेचारा गधा घर भाग आया.

यहाँ पढ़ें –पंचतंत्र की 15 प्रसिद्ध कहानियाँ

About bhartihindi

भारती हिंदी पर प्रतिदिन नयी नयी रोचक कहानियाँ और महत्वपूर्ण जानकारी शेयर की जाती हैं, हम अपने सभी पाठकों का दिल धन्यवाद करते हैं।

View all posts by bhartihindi →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *