कविता – हम पंछी उन्मुक्त गगन के | Heart Touching Poem


कविता - हम पंछी उन्मुक्त गगन के Heart Touching poem image
कविता
हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजरे बंद न रह पाएँगे 
कनक – तीलियों से टकराकर 
पुलकित पंख टूट जाएँगे |




हम बहता जल पीने वाले 
मर जाएँगे भूखे – प्यासे 
कहीं भली है कटुक निबोरी 
कनक कटोरी की मैदा से |

स्वर्ण श्रिंखला के बंधन में
अपनी गति उड़ान सब भूले
बस सपनों में देख रहे हैं
तरु की फुनगी पर के झूले |

ऐसे थे अरमान की उड़ते 
नील गगन की सीमा पाने
लाल किरण – सी चोंच खोल
चुगते तारक अनार के दाने |

होती सीमाहीन छितिज से
इन पंखों की होड़ा-होड़ी
या तो छितिज मिलन बन जाता 
या तनती सांसो की डोरी |

नीर न दो चाहे टहनी का 
आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो 
लेकिन पंख दिए हैं तो 
आकुल उड़ान में विघ्न न डालो |  
                                    -शिवमंगल सिंह सुमन

    About bhartihindi

    भारती हिंदी पर प्रतिदिन नयी नयी रोचक कहानियाँ और महत्वपूर्ण जानकारी शेयर की जाती हैं, हम अपने सभी पाठकों का दिल धन्यवाद करते हैं।

    View all posts by bhartihindi →

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *