बालहंस – आम का पेड़ किसका – balhans story in hindi



एक दिन की बात हैं। राजा सुरसेन के दरबार में दो पड़ोसी मोहन और सोहन न्याय के लिए आये।
मोहन ने कहा – महाराज मैंने एक आम का पेड़ लगाया था, उसकी सेवा की थी और जब आज पेड़ में आम तोड़ने का समय आया तो मेरा यह पड़ोसी कहता हैं की वह पेड़ उसका हैं, आप न्याय करें महाराज।
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बालहंस की कहानी
फिर सोहन बोला – नहीं महाराज यह झूठ बोल रहा हैं, वह पेड़ मैंने लगाया था। मैंने उसकी देखभाल की थी, वह पेड़ मेरा हैं।

राजा के सामने दोनों पेड़ को अपना बता रहे थे, किसी को मोहन की बात सच लग रही थी, तो किसी को सोहन की बात, किसी एक कि बात पर विश्वास करना कठिन था।
दोनों राजा से न्याय माँग रहे थे, राजा सुरसेन सोच में पड़ गए आखिर यह पेड़ किसका हैं..?
कुछ देर बाद राजा ने कहा की जाओ इसका फैसला कुछ दिन बाद किया जाएगा, मोहन और सोहन दोनों वापस चले गये।
कुछ दिन बाद राजा ने अपने चार लोगों को डाकू के भेष में पेड़ काटने भेजा।
जब डाकू पेड़ काटने चले गए तो राजा ने अपने दो नौकर से कहा जाओ मोहन और सोहन से कहना की डाकू तुम्हारा पेड़ काट रहे हैं।
मोहन को जैसे ही खबर मिली की डाकू उसका पेड़ काट रहे हैं,  वह हाथ में एक डंडा लेकर दौरा।
सोहन को भी नौकरों ने यह खबर दिया की डाकू तुम्हारा पेड़ काट रहे हैं, लेकिन सोहन पर इस बात का कुछ खास फर्क नहीं पड़ा, वह पेड़ देखने भी नहीं गया की डाकू सच में हैं या कोई दूसरा उसका पेड़ काट रहा हैं।
मोहन ने डंडे से सभी डाकुओ को मार – मार कर घायल कर दिया।
कुछ दिन बात दोनों मोहन और सोहन राजा के दरबार में फिर से पहुँचे
राजा ने कहा – तुम्हारे पेड़ को काटने के लिए डाकू मैनें ही भेजा था।
मोहन ने डाकुओ से अपने पेड़ को बचाया क्यों की उसने यह पेड़ लगाया था।
यह सोहन सिर्फ झूठ बोल रहा हैं, अगर इसने यह पेड़ लगाया होता तो इसके मन में पेड़ के प्रति स्नेह होता और यह भी मोहन की तरह उसकी रक्षा के लिए जरूर जाता था।
सोहन ने अपनी गलती स्वीकार कर लिया उसे सौ कोड़े की सजा मिली और मोहन को उसका पेड़ वापस मिल गया।
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