कहानी – राजा और बुद्धिमान कवि | Moral Story – Raja aaur buddhiman kavi


Moral Story – Raja aaur buddhiman kavi

किसी समय में सुंदर नगर नाम का एक राज्य था | सुन्दर नगर की जनता बहुत मेहनती और परिश्रमी थी |

 लेकिन वहाँ पर राजा के अधिकारी उन पर बहुत अत्याचार करते थे |
 वे जनता से तीनगुना ज्यादा लगान वसूलते थे ,लेकिन राजा को इस बात की जानकारी नही थी  | 
उस नगर में एक कवि भी रहता था वह बहुत बुद्धिमान था | वह उन अधिकारियों से दुखी रहता था |

एक दिन कवि राजा के महल पहुँचा , द्वार पर सैनिक ने उसे रोका और राजा से मिलने का कारण पूछा..?
कवि ने कहा – में राजा को अपनी नई कविता सुनना चाहता हूँ |

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सैनिक ने उसे अंदर जाने देने के लिये पांच चाँदी के सिक्के माँगे |
कवि ने कहा – मेरे पास अभी पांच चाँदी के सिक्के नहीं हैं |
सैनिक ने सोचा यह कवि हैं तो इसे राजा बहुत कुछ इनाम देंगे , इसलिए सैनिक बोला अगर तुम राजा से मिलने 
वाले इनाम का आधा हिस्सा मुझे देने का वादा करो तो में तुम्हें जाने दूंगा |
कवि मान गया उसने उसे आधा इनाम देने का वादा किया |
वह राजा से दरबार में मिला और अपनी नयी कविता सुनायी | 
राजा कविता सुन बहुत खुश हुआ | उसने कवि से इनाम माँगने के लिए कहा |
कवि बोला – महाराज मुझे इनाम में सौ कोरे मारा जाए |
राजा को यह सुन आश्चर्य हुआ , उसने इसका कारण पूछा ..?
कवि बोला – महाराज आपके द्वार पर सैनिक ने मुझसे वादा कराया हैं | मुझे जो इनाम मिलेगा उसका 
आधा हिस्सा वो लेगा , इसलिए महाराज मुझे सौ कोरे ही चाहिए  |



यह सुन राजा को बहुत गुस्सा आया , उसने कवि से राज्य का हाल पूछा तो कवि ने सारी बात राजा को बता दी |

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राजा कवि की चतुराई से खुश हुआ | उसे अपना मंत्री बनाया , और  उन सभी अधिकारियों और उस सैनिक को 
दंड दिया | यह देख राज्य की जनता बहुत खुश हुई |

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