Deshbhakti Kavita | देशभक्ति कविता – पुष्प की अभिलाषा


Deshbhakti Kavita – देशभक्ति कविता – पुष्प की अभिलाषा 

This is a deshbhakti poem and kavita in hindi
देशभक्ति कविता


 चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गुंथा जाऊँ


चाह नहीं में प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ

चाह नहीं सम्राटों के सिर पर हे हरि डाला जाऊँ

चाह नही देवों के सर पर चढूं भाग्य पर इठलाऊँ

मुझे तोड़ लेना बनमाली उस पथ देना तुम फ़ेंक

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जावे वीर अनेक

                                         कवि – माखनलाल चतुर्वेदी 

About bhartihindi

भारती हिंदी पर प्रतिदिन नयी नयी रोचक कहानियाँ और महत्वपूर्ण जानकारी शेयर की जाती हैं, हम अपने सभी पाठकों का दिल धन्यवाद करते हैं।

View all posts by bhartihindi →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *