कविता -कोशिस करने वालों की कभी हार नहीं होती | Hindi Poem


लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिस करने वालों की कभी हार नहीं होती,


नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चढ़ती हैं 
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती हैं ,

मन का विश्वास रगों में साहस भरता हैं 
चढ़ कर गिरना गिर कर चढ़ना न अखरता हैं ,

मेहनत उसकी बेकार नहीं हर बार होती 
कोशिस करने वालों की कभी हार नहीं होती ,

डुबकियाँ सिन्धु में गोताखोर लगता हैं 
जा – जा कर खाली हाथ लौट आता हैं ,

मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में 
बढ़ता दूना विश्वास इसी हैरानी में ,

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिस करने वालों की कभी हार नहीं होती ,

असफलता एक चुनौती हैं स्वीकार करो 
क्या कमी रह गयी हैं देखो और सुधार करो ,

जबतक सफल न हो तुम नींद – चैन  का त्याग करो तुम
 संघर्स का मैदान छोड़ न भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय -जयकार नही होती 
कोशिस करने वालों की कभी हार नहीं होती
                                    
                                                                                        -सोहनलाल द्विवेदी



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